Saturday, June 26, 2021

इतिहास आज भी गवाह हैं कि कबीर साहेब जी की मृत्यु नहीं हुई

 *कबीर परमेश्वर का प्राकाट्य।*


ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग एक-दो घण्टे पहले का समय) में कविर्देव (कबीर परमेश्वर) अपने निज धाम ऋतधाम (सतलोक) से काशी के लहरतारा तालाब में  कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट हुए। 


पूर्ण परमात्मा कविर्देव /कबीर साहेब चारों युगों में आते है, माँ की कोख से जन्म नहीं लेते है, सशरीर आते है सशरीर जाते है। 

सतयुग में सतसुकृत कह टेरा, त्रेता नाम मुनींद्र मेरा।

द्वापर में करूणामय कहाया, कलयुग नाम कबीर धराया।।


कबीर परमेश्वर प्रत्येक में एक लीला ऐसी करते है। शिशु रूप में प्रकट होकर लीला करते हुऐ बड़े होते है तथा सतगुरु रूप में तत्वज्ञान का उपदेश देते हैं।


जब कबीर साहेब 1398 में काशी में लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर आये तब वहाँ स्नान करने गये निःसन्तान दम्पत्ति नीरू ने तालाब से लाकर नीमा को दे दिया। नीमा ने गोद में लिया तो बहुत शीतलता का अनुभव किया।

गरीब, गोद लिया मुख चूम करि, हेम रूप झलकंत।

जगर मगर काया करै, दमकै पदम् अनंत।।

जब परमेश्वर कबीर साहेब धरती पर सशरीर अवतरित हुए और पुण्यकर्मी दंपत्ति ने उनको गोद में लिया तो उनके शरीर की शोभा अद्भुत ही थी।


बालक रूप में कबीर परमात्मा को लेकर जब नीरू तथा नीमा अपने घर जुलाहा मोहल्ला आए। जिस भी नर व नारी ने नवजात शिशु रूप में परमेश्वर कबीर जी को देखा वह देखता ही रह गया। परमेश्वर का शरीर अति सुन्दर था। आँख जैसे कमल का फूल हो, घुँघराले बाल, लम्बे हाथ, लम्बी-2 अँगुलियाँ, शरीर से मानो नूर झलक रहा हो। पूरी काशी नगरी में ऐसा अदभूत बालक नहीं था।


पूरी काशी परमेश्वर कबीर जी के बालक रूप को देखने को उमड़ पड़ी। स्त्री-पुरूष झुण्ड के झुण्ड बना कर मंगल गान गाते हुए उनको देखने आए।


सभी देव तथा अवतार माँ के गर्भ से जन्म लेते है तथा समय पूर्ण होने पर मृत्यु को प्राप्त होते है। इसलिए उनकी #जयंती मनाई जाती है।

जबकि पूर्ण परमात्मा कविर्देव/ कबीर साहेब/ पूर्ण ब्रह्म/ अल्लाहु अकबर/ अविनाशी परमात्मा माँ के गर्भ से जन्म नहीं लेते हैं। ना ही उनकी मृत्यु होती है। सशरीर आते हैं सशरीर जाते हैं। लीला करते हुऐ बड़े होते हैं। 


इसलिए कबीर परमेश्वर की जयंती नहीं प्रकट दिवस मनाया जाता है।

इस बार 24 जून, 2021 को कबीर साहेब का प्रकट दिवस है। (ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्ण मासी)



अधिक जानकारी के लिए देखे Satlok Ashram यूट्यूब चैनल।


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Wednesday, June 23, 2021

Kabir Prakat Diwas 24 June 2021

संत कबीर ने दुनिया को पढ़ाया एकता का पाठ, 624वें प्रकट दिवस पर पढ़ें उनकी जीवनी

कबीर साहेब का प्राकट्य सन 1398 (संवत 1455), ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को ब्रह्ममूहर्त के समय कमल के पुष्प पर हुआ था. कबीर जी के संबंध में भ्रांति हैं कि उन्होंने एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से जन्म लिया था. लेकिन यह असत्य है. 

संत कबीर ने दुनिया को पढ़ाया एकता का पाठ,  624वें प्रकट दिवस पर पढ़ें उनकी जीवनी

भारत के इतिहास को तीन कालखंडों में विभाजित किया गया है जैसे आदिकाल, मध्यकाल और आधुनिक काल. मध्यकाल के भक्तियुग के प्रसिद्ध संत जिन्हें लोग संत कबीर के नाम से जानते हैं तथा जिनके दोहे आज भी साहित्य की अनमोल धरोहर हैं. संत कबीर ही वास्तव में पूर्ण परमेश्वर हैं जो आज से लगभग 624 वर्ष पूर्व अपने तत्वज्ञान का प्रचार करके गए. कबीर साहेब के प्रिय शिष्य आदरणीय धर्मदास जी ने कबीर साहेब जी की अनमोल वाणियों का संकलन कबीर सागर, कबीर साखी, आदि में किया. इसके अतिरिक्त कबीर साहेब द्वारा की गई सभी लीलाओं का स्पष्ट वर्णन हमारे वेदों में वर्णित है.

कमल के फूल पर कबीर परमेश्वर का अवतरन

कबीर साहेब का प्राकट्य सन 1398 (संवत 1455), ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को ब्रह्ममूहर्त के समय कमल के पुष्प पर हुआ था. कबीर जी के संबंध में भ्रांति हैं कि उन्होंने एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से जन्म लिया था. लेकिन यह असत्य है. वेदों में वर्णित विधि के अनुसार परमेश्वर कबीर साहेब हल्के तेजपुंज का शरीर धारण करके सशरीर सतलोक से आए और कमल के पुष्प पर अवतरित हुए. इस घटना के प्रत्यक्ष दृष्टा ऋषि अष्टानंद जी थे.

परमेश्वर कबीर साहेब का लालन-पालन

नीरू और नीमा निसंतान ब्राह्मण दंपति थे, इनको कबीर साहेब ने अपने माता पिता के रूप में चुना. वास्तव में उनका नाम गौरीशंकर और सरस्वती था. वे सच्चे शिवभक्त थे. अन्य ढोंगी ब्राह्मण उनसे ईर्ष्या करते थे. इसका फायदा उठाया मुस्लिम काजीयों ने. बलपूर्वक उनका धर्मांतरण करके उनके नाम नूर अली व नियामत कर दिए गए जिन्हें अपभ्रंश भाषा में नीरू और नीमा कहा जाने लगा. जीविकोपार्जन करने के लिए दंपति ने जुलाहे का कार्य आरंभ कर दिया.

ज्येष्ठ की पूर्णिमा को नीरू और नीमा भी स्नान हेतु जब लहरतारा तालाब पर पहुंचे तो शिशु रूप धारण किए हुए कबीर साहेब को कमल के फूल पर पाया तो शिशु को अपने साथ घर ले आए.

नीमा के पुत्र ने 25 दिनों तक कुछ भी ग्रहण नहीं किया था परंतु ह्रृष्ट-पुष्ट ऐसे था जैसे बालक रोज एक किलो दूध पीता हो. नीमा और नीरू बालक के दूध न पीने से अत्यंत चिंतित थे. कबीर परमेश्वर ने नीरू-नीमा की इस चिंता को दूर करने के लिए शिवजी को प्रेरणा की, शिवजी ऋषि रूप धारण करके आए. तब कबीर जी के कहने पर शिवजी ने नीरू को एक कुंवारी गाय (बछिया) लाने का आदेश दिया. कुंवारी गाय के ऊपर थपकी मारते ही नीचे रखा दूध का पात्र भर गया और परमात्मा ने वह दूध ग्रहण किया. पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब की इस लीला का वर्णन वेदों में भी है.

जब काजी नीरू के घर पर बालक का नामकरण करने आए, ज्यों ही उन्होंने कुरान खोली उसके सारे अक्षर कबीर-कबीर हो गए तथा परमेश्वर कबीर ने कहा कि उनका नाम कबीर रखा जाए. कुछ समय पश्चात काजी-मुल्ला कबीर साहेब की सुन्नत करने के लिए पंहुच गए. परमात्मा ने उन्हें एक लिंग के स्थान पर कई लिंग दिखाए और कहा कि आपके धर्म में तो एक ही सुन्नत करने का विधान है अब आप क्या करेंगे तथा उन्हें उपदेश दिया कि अल्लाह ने मनुष्यों को बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है. यह लीला देखकर काजी व मुल्ला डरकर भाग गए. 

कबीर साहेब का सत्यलोक गमन

कबीर साहेब जी ने लगभग 120 वर्ष तक जुलाहे की भूमिका की और तत्वज्ञान का प्रचार किया. उस समय यह मान्यता प्रचलित थी कि काशी में मरने वाला स्वर्ग जाता है और मगहर में मरने वाला नरक जाता है. तब कबीर साहेब ने काशी के सभी पंडितों को चुनौती दी और मगहर अपने साथ चलने को कहा कि देखना मैं कहां जाता हूं? कबीर साहेब के शिष्यों में दोनों धर्मों के लोग थे जिनमें काशी नरेश राजा बीर सिंह बघेल व मगहर रियासत के राजा बिजली खान पठान भी थे. दोनों ही धर्मों के लोगों ने कबीर साहेब के शरीर का अंतिम संस्कार अपने धर्म के हिसाब से करने के लिए ठान लिया था एवं उन्हें शरीर न मिलने पर गृहयुद्ध की पूरी तैयारी भी कर ली थी. परमेश्वर कबीर सब जानते थे.

परमेश्वर कबीर जी ने मगहर पहुंचकर बहते पानी में स्नान करने की इच्छा जताई. बिजली खान पठान ने शिवजी के श्राप से सूख चुकी आमी नदी के बारे में बताया. तब परमात्मा कबीर जी ने आमी नदी में जल प्रवाहित किया. कबीर जी के लिए एक चादर नीचे बिछाई गई उस पर कुछ फूल बिछाए गए एवं उन पर कबीर साहेब जी ने लेट कर दूसरी चादर ऊपर से ओढ़ ली. सन 1518 (संवत 1575) माघ शुक्ल पक्ष, तिथि एकादशी को परमेश्वर कबीर साहेब जी ने सशरीर इस लोक से प्रस्थान किया. वहां उपस्थित सभी को आकाशवाणी के माध्यम से परमात्मा कबीर साहेब जी ने बताया कि वे स्वर्ग से भी ऊंचे स्थान सतलोक जा रहे हैं तथा हिंदुओं व मुस्लिमों को आदेश दिया कि कोई भी आपस में न लड़े तथा जो भी चादर के नीचे मिले उसे आधे-आधे बांट लें. परमात्मा ने हिंदुओं व मुस्लिमों को प्रेम से रहने का आशीर्वाद दिया जो आज भी मगहर में फलीभूत है.

वहां उपस्थित लोगों ने जब चादर हटाई तो केवल सुगन्धित फूल मिले. उन सुंगधित फूलों को दोनों धर्मों ने आपस में बांट लिया और उन पर यादगार बनाई. आज भी मगहर में यह यादगार मौजूद है. कुछ फूल काशी में कबीर चौरा नामक यादगार पर रखे हैं. परमेश्वर कबीर जी की सभी लीलाओं का वेदों और शास्त्रों में प्रमाण देखने के लिए आप www.jagatgururampalji.org पर जा सकते हैं.

Sunday, May 23, 2021

#HEALTH ARTS

 © f / HINDI.LETTEST HEALTH ARTS


खाना खाने के बाद जरूर 1 इलायची और 1 लौंग का सेवन करे, यह दोनों ही आप के पेट में खाना खाने के बाद एसिडिटी


और गैस को बनने से रोक देती है।

Jaipur Lockdown

राजस्थान सरकार मुख्यमंत्री जनसम्पर्क प्रकोष्ठ

प्रदेश में 24 मई से 8 जून तक त्रि-स्तरीय जन अनुशासन लॉकडाउन

जयपुर, 23 मई मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में शनिवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में जन अनुशासन लॉकडाउन को 15 दिन और बढ़ाने के लिए दिए गए सुझाव के मद्देनजर प्रदेश में 24 मई से 8 जून तक त्रि-स्तरीय जन अनुशासन लॉकडाउन की गाइडलाइन जारी की गई है। मंत्रिपरिषद ने पॉजिटिव केस की संख्या में कुछ कमी आने के बावजूद संक्रमण एवं मृत्यु दर तथा अस्पतालों पर अत्यधिक दबाव होने के कारण लॉकडाउन जैसे सख्त कदमों को जारी रखने का सुझाव दिया था।

त्रि-स्तरीय जन अनुशासन लॉकडाउन के तहत परिवार, वार्ड, ग्राम शहर एवं राज्य स्तर पर सामाजिक व्यवहार में कोविड प्रोटोकॉल के अनुरूप बदलाव लाने की अपेक्षा की गई है। प्रथम स्तर पर पारिवारिक जिम्मेदारी समझते हुए लोगों को कुछ समय के लिए बाहरी व्यक्तियों का घर में प्रवेश रोकना होगा। अतिआवश्यक होने पर खुले स्थान पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मिला जा सकता है, ताकि परिवार के बुजुर्ग, बच्चे एवं अन्य लोग सुरक्षित । दूसरे स्तर पर गांव और मोहल्ले में ऐसी गतिविधि पर प्रभावी अंकुश रखना होगा, जिनसे संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी स्थान पर 5 से ज्यादा लोग एकत्र ना हों।

इसी प्रकार तीसरे स्तर पर मेडिकल इमरजेंसी और अनुमत श्रेणी के अलावा एक शहर से दूसरे शहर, शहर से गांव, गांव से शहर तथा एक गांव से दूसरे गांव में आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित रखना होगा। ग्राम स्तरीय निगरानी समितियों को इसमें अपनी विशेष भूमिका निभानी होगी। समस्त प्रदेशवासियों को इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए अपने सामाजिक व्यवहार में बदलाव लाना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि विवाह समारोह में भीड़ जुटना संक्रमण के प्रसार का एक बड़ा कारण रहा है। इसे देखते हुए विशेषज्ञों की सलाह एवं जनप्रतिनिधियों के सुझाव पर 30 जून तक विवाह स्थगित रखने की अपेक्षा की गई है। उन्होंने कहा है कि लोग कोविड प्रोटोकॉल को आवश्यक रूप से अपने व्यवहार में शामिल करें ताकि स्थिति में सुधार होने पर लॉकडाउन की पाबंदियों में शिथिलता दी जा सके। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन से कुछ तकलीफें जरूर होती हैं, लेकिन संक्रमण प्रसार की वर्तमान स्थितियों में प्रदेशवासियों की जीवनरक्षा के लिए ये प्रतिबंध लगाना जरूरी है।

विगत दिनों जयपुर जिले में संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में टेस्ट, ट्रेक एवं ट्रीट प्रोटोकॉल की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने का निर्णय किया गया था। जयपुर के लिए बनाए गए इस मॉडल को प्रदेशभर में लागू किया जाएगा। इसके तहत आईएलआई लक्षणों वाले मरीजों का चिन्हीकरण, मेडिकल किट वितरण, जांच, होम आइसोलेशन एवं उपचार की नियमित निगरानी की जाएगी। डोर-टू-डोर सर्वे का काम इस प्रकार किया जाएगा जिससे प्रत्येक घर का सर्वे 10 दिन में हो जाए और यह प्रक्रिया प्रत्येक 10 दिवस में दोहरायी जाए।
त्रि-स्तरीय जन अनुशासन लॉकडाउन के तहत प्रमुख दिशा-निर्देश -

राज्य में 24 मई की प्रातः 5 बजे से 8 जून की प्रातः 5 बजे तक त्रिस्तरीय जन अनुशासन लॉकडाउन रहेगा। • सार्वजनिक स्थल एवं कार्यस्थल पर फेस मास्क या फेसकवर नहीं लगाने पर

जुर्माना राशि 500 से बढ़ाकर 1 हजार रूपए की गई है।

• डेयरी एवं दूध की दुकानों, मंडियां, फल-सब्जी, फूल माला की दुकानों तथा फल-सब्जी का ठेले साइकिल, रिक्शा, ऑटो रिक्शा एवं मोबाइल वैन के माध्यम से विक्रय को छोड़कर बाजार शुक्रवार 28 मई दोपहर 12 बजे से मंगलवार 1 जून प्रातः 5 बजे तक तथा शुक्रवार 4 जून दोपहर 12 बजे से मंगलवार 8 जून प्रातः 5 बजे तक बंद रहेंगे।

राज्य में विवाह समारोह 30 जून, 2021 तक स्थगित रखे जाएं। विवाह से संबंधित किसी भी प्रकार के समारोह, डीजे, बारात एवं निकासी तथा प्रीतिभोज आदि की अनुमति 30 जून तक नहीं होगी।

विवाह घर पर ही अथवा कोर्ट मैरिज के रूप में ही करने की अनुमति होगी, जिसमें केवल 11 व्यक्ति ही अनुमत होंगे जिसकी सूचना वेब पोर्टल Covidinfo.rajasthan.gov.in पर या हेल्प लाइन नम्बर 181 पर देनी होगी।

• विवाह में बैण्ड बाजे, हलवाई, टैन्ट या इस प्रकार के अन्य किसी भी व्यक्ति के सम्मिलित होने की अनुमति नहीं होगी।

• शादी के लिए टैन्ट हाउस एवं हलवाई से संबंधित किसी भी प्रकार के सामान

की होम डिलीवरी भी नहीं की जा सकेगी। मैरिज गार्डन, मैरिज हॉल एवं होटल परिसर शादी समारोह के लिए बंद रहेंगे। विवाह स्थल मालिकों, टैन्ट व्यवसायियों, कैटरिंग संचालकों और बैण्ड बाजा वादकों आदि को एडवांस बुकिंग राशि आयोजनकर्ता को लौटानी होगी या बाद

में आयोजन करने पर समायोजित करनी होगी। ● किसी भी प्रकार के सामूहिक भोज की अनुमति नहीं होगी।

• आमजन से अपील है कि पूजा-अर्चना, इबादत प्रार्थना घर पर रहकर ही करें।

मेडिकल सेवाओं के अतिरिक्त सभी प्रकार के निजी एवं सरकारी परिवहन के साधन जैसे- बस, जीप आदि पूरी तरह बंद रहेंगे। बारात के आवागमन के लिए बस, ऑटो, टैम्पो, ट्रेक्टर, जीप आदि की अनुमति नहीं होगी।

• अन्तर्राज्यीय एवं राज्य के भीतर माल का परिवहन करने वाले भारी वाहनों का आवागमन माल की लोडिंग एवं अनलोडिंग तथा इस कार्य के लिए नियोजित व्यक्ति अनुमत होंगे।

राज्य में मेडिकल, अन्य इमरजेंसी एवं अनुमत श्रेणियों को छोड़कर एक जिले से दूसरे जिले, एक शहर से दूसरे शहर शहर से गांव, गांव से शहर और एक गांव से दूसरे गांव में सभी प्रकार के आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

• वैक्सीनेशन के लिए लोग अपने निवास स्थान से संबंधित नगरीय निकाय या पंचायत समिति की सीमा में स्थित टीकाकरण स्थल पर ही जा सकेंगे।

राज्य के बाहर से आने वाले यात्रियों को 72 घंटे के भीतर करवाई गई आरटीपीसीआर नेगेटिव जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

• यदि कोई यात्री नेगेटिव जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करता है, तो उसे 15 दिन के

लिए क्वारेंटीन किया जाएगा।
श्रमिकों के पलायन को रोकने के लिए उद्योगों एवं निर्माण से संबंधित सभी इकाइयों में कार्य करने की अनुमति होगी।

• श्रमिकों को आवागमन में असुविधा नहीं हो, इसके लिए Covidinfo.rajasthan.gov.in के माध्यम से ट्रांजिट पास सेल्फ जनरेट किया जा सकेगा। यह पास कार्यावधि से एक घंटे पहले तथा कार्यावधि खत्म होने के एक घंटे बाद तक घर से कार्य स्थल एवं कार्य स्थल से घर के लिए मान्य होगा। उद्योग एवं निर्माण इकाई द्वारा श्रमिकों के आवागमन के लिए विशेष बस का

संचालन अनुमत होगा। जिसकी सूचना ऑनलाइन वेब पोर्टल पर उपलब्ध करानी

होगी।

• निर्माण सामग्री से संबंधित दुकानें नहीं खुल सकेगी। माल के आवागमन के लिए दी गई छूट के अनुसार दूरभाष अथवा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ऑर्डर मिलने पर सामग्री की आपूर्ति की जा सकेगी। खाद-बीज एवं कृषि उपकरण, पशु चारा एवं किराना की दुकान मंगलवार से

शुक्रवार तक प्रातः 6 बजे से प्रातः 11 बजे तक खुल सकेंगी। ऑप्टीकल्स की

दुकानें मंगलवार एवं शुक्रवार को प्रातः 6 बजे से 11 बजे तक खोली जा

सकेंगी।

• राशन की दुकानें प्रतिदिन सुबह 10 से शाम 4 बजे तक तथा मेडिकल की दुकानें प्रतिदिन 24 घंटे खोली जा सकेंगी।

• फल-सब्जी का ठेले, साइकिल, रिक्शा, ऑटो रिक्शा एवं मोबाइल वैन के माध्यम से विक्रय प्रतिदिन प्रातः 6 बजे से शाम 5 बजे तक अनुगत होगा। मण्डियां, फल-सब्जी एवं फूल मालाओं की दुकानें प्रतिदिन प्रातः 6 से प्रातः 11 बजे तक खोली जा सकेंगी।

• डेयरी एवं दूध की दुकानें प्रतिदिन सुबह 6 से 11 बजे तथा शाम 5 बजे से 7 बजे तक अनुमत होंगी इंदिरा रसोई एवं प्रोसेस्ड फूड की होम डिलीवरी प्रतिदिन रात 9 बजे तक अनुमत होगी।

ई-मित्र सेवाएं शाम 4 बजे तक अनुमत होंगी।

मनरेगा कार्यों के लिए ग्रामीण विकास विभाग अलग से आदेश जारी करेगा।

रबी की फसलों की मंडियों में आवक तथा समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद की गतिविधियां कोविड प्रोटोकॉल की पालना के साथ अनुमत होगी। किसानों के मंडी पहुंचने एवं वापस आने के अलावा मंडी परिसर के बाहर आवागमन पूर्णतः प्रतिबंधित होगा। किसानों को मंडी जाते समय अपने माल का सत्यापन एवं वापस जाते समय ब्रिकी की रसीदें या बिल का सत्यापन करवाना होगा।

• कुछ जिलों में संक्रमण के प्रसार की स्थिति में सुधार हुआ है। स्थिति और ठीक होने तथा लोगों द्वारा जन अनुशासन की प्रभावी पालना सुनिश्चित होने पर 1 जून से इन जिलों में व्यावसायिक गतिविधियों में और छूट दी

जा सकती है। • व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन के दौरान दुकानदार गोले बनाकर सोशल डिस्टेंसिंग की पालना नहीं करेंगे तो दुकानदार पर 500 रूपए का जुर्माना लगाया जायेगा ।

इतिहास आज भी गवाह हैं कि कबीर साहेब जी की मृत्यु नहीं हुई

 *कबीर परमेश्वर का प्राकाट्य।* ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग एक-दो...